⛳"धन तेरस" ⛳ ⤵ धन तेरस कार्तिक कृष्णपक्ष की तेरस यानी दीपावली से दो रोज पहले आती है। धनतेरस के दिन देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेरदेव तथा दीपावली पर धन की देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है।ऐसा माना जाता है कि धनतेरस व दीपावली के दिन किया गया दान, हवन, पूजन व उपायों का फल अक्षय (संपूर्ण) होता है। तंत्र शास्त्र के अनुसार, अगर इस दिन कुछ विशेष उपाय किए जाएं या कुछ विशेष वस्तुओं को घर में रखा जाए तो मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उपाय करने वाले को मालामाल भी कर सकती हैं। 🔹"धन तेरस के फायदे" ⤵ लोक वेद के अनुसार:- ऐसा माना जाता है कि धनतेरस के दिन यदि आप चीनी, बताशा, खीर, चावल, सफेद कपड़ा आदि अन्य सफेद वस्तुएं दान करते हैं, तो आपको धन की कमी नहीं होगी। जमा पूंजी बढ़ने के साथ ही कार्यों में आ रहीं बाधाएं भी दूर होंगी। इस दिन किसी किन्नर को अवश्य दान दें और उससे एक सिक्का मांग लें। यदि किन्नर आपको वो सिक्का खुशी से दे, तो बहुत अच्छा यानी बहुत फायदेमंद रहता है। "धनतेरस की पूजा विधि":-⤵ सबसे पहले मिट्टी का हाथी और धन्वंतरि भगवानजी की फोटो स्थापित करें। चांदी...
प्राकृतिक आपदा और खतरे की जानकारी:- प्राकृतिक जोखिम किसी ऐसी घटना के घटने की सम्भावना को कहते हैं जिससे मनुष्यों अथवा पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कई प्राकृतिक खतरे आपस में सम्बंधित हैं, जैसे की भूकंप सूनामी ला सकते हैं, सूखा (drought) सीधे तौर पर अकाल (famine) और बीमारियाँ पैदा करता है। खतरे और आपदा के बीच के विभाजा का एक ठोस उदहारण ये है की 1906 में सैन फ्रांसिस्को में आया भूकंप (1906 San Francisco earthquake) एक आपदा थी, जबकि कोई भी भूकंप एक तरह का खतरा है। फलस्वरूप भविष्य में घट सकने वाली घटना को खतरा कहते हैं और घट चुकी या घट रही घटना को आपदा कहते है। स्वास्थ्य और रोग ⤵ महामारी:- महामारी (epidemic) एक छूट की बीमारी के फैलने को कहते हैं जो की मानव व आबादी में बहुत तेजी से फिलती है। यदि महामारी विश्वभर में फ़ैल जाए तो उसे विश्वमारी (pandemic) कहते हैं। इतिहास भर में महामारियों के अनेकों वर्णन आते रहे हैं, जैसे की काली मौत (Black Death).पिछले सौ वर्षों की महत्त्वपूर्ण विश्व्मारियों में शामिल हैं:- वर्तमान समय में महामारी जो विश्वमारी 2019-20 कोरोना वायरस Cov...
नशा मनुष्य जीवन का नाश कर देता है इसको त्यागने में ही सबका हित है...संत गरीबदास जी अपनी वाणी में कहते है- सुरापान मद्य मांसाहारी, गवन करे भोगे पर नारी। सत्तर जन्म कटत हैं शीशम, साक्षी साहिब हैं जगदीशम।। सुरापान व मांस आदि खाने का अंजाम जब इतना बुरा है तो इससे त्यागने में ही भलाई है। 💦 नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश करता है। शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं फेफड़े, लीवर, गुर्दे, हृदय। शराब सबसे प्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है। इन सब से निजात पाने के लिए संत रामपाल जी महाराज के "तत्वज्ञान" का सत्संग अवश्य सुनें।
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